Showing posts with label happiness. Show all posts
Showing posts with label happiness. Show all posts

Friday, March 6, 2009

मेरे ख़्वाब

आज मैंने तुम्हारे ख़्वाब देखें
ख़्वाब में तुम्हे बार बार देखें
क्या बात है मैं समझ नहीं पाया
लेकिन हर बात में सिर्फ़ तुम्हे ही पाया

क्यूँ अब मुझे यह अजीब नहीं लगता
कि हमारे बीच कुछ भी तो नहीं
वह सबके समझ के परे ही सही
लेकिन फ़िर भी है वह सबसे बढ़कर

मैं उम्मीद भी नहीं करता किसी से
कि समझे वो मेरी बातों को
समझे हमारे रिश्ते को
या फ़िर मेरे इरादे को

तुम मेरी ख़्वाब में ऐसे ही आना हर बार
मुझे रहेगा तुम्हारा हर रात इंतज़ार
उस इंतज़ार के पल को भी जीना चाहता हूँ
कि अब मैं उस ख़्वाब के लिए ख़्वाब में ही मरना चाहता हूँ