तुम क्यूँ नहीं समझती की हमारे सपने अलग हैं
तुम क्यूँ नहीं समझती की हमारी पसंद भी एक नहीं
चिडियों की चहचहाह्ट मुझे भाता नहीं हैं
पहाङो की खुशबू भी कभी मैंने समझा नहीं
हम इतने अलग होकर भी क्यूँ चाहते हैं पास आना
क्यूँ लगता हैं की तुम्हारे बीना जी नहीं पाउँगा
जबकि हम दोनों को मालूम हैं यह कड़वी सच्चाई
की हम साथ रहकर भी कभी खुश नहीं रह पाएंगे
शायद ये मान लेना हीं हम दोनों के लिए अच्छा हैं
की हर कोशिश के बाद भी यह सच्चाई बदल नहीं सकती
तुम मेरे कितना कहने पर भी मीठा नहीं खाओगी
और पिंक कलर का शर्ट मुझे कभी पसंद नहीं आएगा
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Thursday, January 29, 2009
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